बारह ज्योतिर्लिंगों का पावन दर्शन एक ही पवित्र परिसर में
अर्धलक्षेश्वर धाम, मांगलिया में भारतवर्ष के समस्त 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य विग्रहों की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की जा रही है, जिससे श्रद्धालु एक ही तीर्थ में द्वादश परिक्रमा का पुण्य अर्जित कर सकें।
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
जो मनुष्य नित्य प्रातः उठकर इन बारह ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करता है, उसके सातों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

एक ही परिक्रमा में द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन
धाम के वास्तु प्रारूप में 12 ज्योतिर्लिंगों को शास्त्रोक्त दिशाओं और पारम्परिक नागर स्थापत्य शैली में एक विशाल पावन प्रांगण के चारों ओर प्रतिष्ठापित करने का पावन संकल्प है।
श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग। चंद्रदेव द्वारा दक्ष प्रजापति के शाप से मुक्ति हेतु यहाँ तपस्या की गई थी।
आध्यात्मिक फल: दीर्घायु, आरोग्य एवं चंद्र दोष की शांति।
श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर स्थित। भगवान शिव एवं माता पार्वती (मल्लिका व अर्जुन) का पावन संगम।
आध्यात्मिक फल: सर्व मनोकामना पूर्ति एवं पारिवारिक सौहार्द।
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग। काल के भी अधिपति महाकाल जहाँ नित्य भस्म आरती से काल दोष समाप्त होते हैं।
आध्यात्मिक फल: अकाल मृत्यु भय निवारण एवं मोक्ष प्रदाता।
श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: नर्मदा नदी के पावन द्वीप पर ॐ के आकार में स्थित। राजा मांधाता एवं भगवान शिव की असीम कृपा भूमि।
आध्यात्मिक फल: आत्मशांति, ज्ञान एवं आध्यात्मिक जागरण।
श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: हिमालय की ऊँची चोटियों पर स्थित। महाभारत काल में पांडवों द्वारा शिव आराधना से पाप मुक्ति का तीर्थ।
आध्यात्मिक फल: पाप संहार एवं कठिन परिस्थितियों में विजय।
श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: भीमा नदी का उद्गम स्थल। भगवान शिव द्वारा राक्षस भीम का वध कर भक्तों की रक्षा का पावन स्थान।
आध्यात्मिक फल: शत्रु भय निवारण एवं आत्मबल संवर्धन।
श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: भगवान शिव के त्रिशूल पर स्थित अनादि अविमुक्त क्षेत्र। जहाँ देहांत होने पर साक्षात तारक मंत्र प्राप्त होता है।
आध्यात्मिक फल: भवबंधन से मुक्ति एवं परम मोक्ष की प्राप्ति।
श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: गोदावरी का उद्गम तीर्थ। यहाँ ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश तीनों के पावन स्वरूप एक साथ विद्यमान हैं।
आध्यात्मिक फल: कालसर्प एवं नारायण नागबलि शांति तीर्थ।
श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: रावण द्वारा लंका ले जाते समय स्थापित पावन शिव स्वरूप। भगवान शिव स्वयं वैद्य स्वरूप में रोगों का हरण करते हैं।
आध्यात्मिक फल: शारीरिक व मानसिक असाध्य रोगों से मुक्ति।
श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: दारुकावन में सुप्रिय वैश्य की भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी द्वारा दारुक राक्षस के वध उपरांत स्थापित लिंग।
आध्यात्मिक फल: सर्व प्रकार के विष व नकारात्मकता का शमन।
श्री रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम द्वारा लंका विजय पूर्व बालू से स्थापित एवं पूजित पावन ज्योतिर्लिंग।
आध्यात्मिक फल: ब्रह्महत्या व बड़े पापों का प्रायश्चित एवं विजय।
श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
पौराणिक प्रसंग: द्वादश ज्योतिर्लिंगों का अंतिम तीर्थ। शिवभक्त घुश्मा की अनन्य निष्ठा से प्रसन्न होकर मृत बालक को जीवनदान।
आध्यात्मिक फल: संतान सुख, वंश वृद्धि एवं पारिवारिक क्लेश मुक्ति।
द्वादश ज्योतिर्लिंग एवं 51,000 शिवलिंग स्थापना में सहभागी बनें
अपने तथा अपने परिवार के नाम से पावन शिवलिंग स्थापित कराकर इस पावन परिक्रमा का स्थायी अंग बनें।
